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कोकिल वायस एक सम, पण्डित मुरख एक | इन्द्रायम दाडिम विषय, जहां न नेक विवेक ||

निम्नलिखित पद्यांश की व्याख्या संदर्भ प्रसंग सहित कीजिए:

कोकिल वायस एक सम, पण्डित मुरख एक |
इन्द्रायम दाडिम विषय, जहां न नेक विवेक ||

सन्दर्भ - यह पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक नवनीत के नीति अष्टक से ली गई है। इसके कवि भारतेन्दु हरिचन्द्र है।

प्रसंग - जहाँ अच्छे बुरे की पहचान न हो, वह देश सुखी नही रह पाता है।

व्याख्या - जिस देश में कोयल और कौए, पण्डित और मूर्ख को एक समान माना जाता हो तथा कडवे फल इन्द्रायन और मीठे फल अनार के विषय मे समान भाव हो तब मान लेना चाहिए कि इस देश मे विवेक और बुद्धि का अधिक अभाव है 

यह पद्यांश भक्ति कवि सूरदास कृत 'सुधा सिंधु' नामक ग्रंथ से लिया गया है।

इसमें कवि ने कोकिल (कोयल) पक्षी और पंडित की तुलना की है-

कोकिल की आवाज मधुर एवं समान होती है। वह सदा एक ही तरह के स्वर में गाता है।

जबकि पंडित (विद्वान) की बातें मूर्खतापूर्ण होती हैं। वे अपने ज्ञान का घमंड करते हैं पर उनमें वास्तविक बुद्धि नहीं होती।

इसीलिए कवि कहते हैं कि इन पंडितों के शब्द तो इंद्राजाल की तरह भ्रमजनक हैं, जिनमें सत्य और नैतिकता नहीं होती।

अर्थात् कोकिल की सरल आवाज पंडितों के शास्त्रीय ज्ञान से अधिक मार्मिक एवं सत्य है। सूरदास जी ने यहाँ पंडितों के आडंबर और घमंड की आलोचना की है। 


MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 4 नीति-धारा 

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