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ऑक्टेन संख्या क्या होती है?, सूत्र, निर्धारण

ऑक्टेन संख्या क्या होती है?, सूत्र, निर्धारण - नमस्कार दोस्तो! स्वागत है आपका RDN Notes ब्लॉग में। तो आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले है “ऑक्टेन संख्या क्या है” के बारे में। and सूत्र, निर्धारण and बने रहिये इस Article में और जानिए पूरे Details में। 

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ऑक्टेन संख्या (Octane Number) -

ऑक्टेन संख्या वह संख्या है जिसका गैसोलीन की दहन क्षमता से सम्बन्ध होता है। इस संख्या के द्वारा गैसोलीन का प्रतिअपस्फोटक गुण प्रदर्शित किया जाता है। जितनी यह संख्या अधिक होगी, गैसोलीन की अपस्फोटन करने की प्रवृत्ति उतनी ही कम होगी। विभिन्न हाइड्रोकार्बनों की अपस्फोटन प्रवृत्ति भिन्न-भिन्न होती है। विभिन्न प्रकार के ईंधनों का दर मान उनके गुणों के आधार पर एक इकाई के रूप में व्यक्त किया जाता है जिसे ऑक्टेन संख्या कहते हैं। आइसो ऑक्टेन (या 2, 2, 4-ट्राइमेथिल पेन्टेन) में बहुत अच्छा अपस्फोटरोधी गुण में पाया जाता है।

ऑक्टेन संख्या का निर्धारण (Determination of Octane Number) - 

एडगर (1927) ने इस रेटिंग  के लिए कुछ मानक निर्धारित किए थे। उन्होंने 2,2,4-ट्राइमेथिल पेन्टेन को श्रेष्ठ प्रति-अपस्फोटक का नाम दिया था। इसके विपरीत  n-हेप्टेन जो कि अत्यधिक अपस्फोटक पदार्थ है, अत्यन्त निक्रिष्ट प्रतिअपस्फोटक का मानक माना गया। आइसो-ऑक्टेन का स्वच्छ दर मान 100 माना गया जबकि n-हेप्टेन के लिए यही माना शून्य माना गया।

Octane Number


अन्य सभी ईंधनों की ऑक्टेन संख्या इन दोनों के पृथक-पृथक अनुपातों में मिलाए गए मिश्रणों के गुणों के आधार पर निर्धारित की जाती है। इस प्रकार किसी ईंधन की अपस्फुटन क्षमता शून्य से लेकर 100 के बीच होगी जो इन दोनों पदार्थों के विभिन्न अनुपात में बने मिश्रणों की अपस्फोटन क्षमता के तुल्य होगी। अतः "किसी ईंधन की ऑक्टेन संख्या आयतन के अनुसार आइसो-ऑक्टेन की वह प्रतिशतता  है जो कि आइसो-ऑक्टेन तथा n- हेप्टेन के उस मिश्रण में उपस्थित होती है जिसकी अपस्फोटन क्षमता जाँच किए जा रहे नमूने के तुल्य होती है। "यह स्पष्ट है कि अच्छे ईंधन के लिए ऑक्टेन संख्या का मान अधिक होना चाहिए अर्थात् जितना अधिक ऑक्टेन संख्या का मान होगा ईंधन उतना ही अच्छा होगा। ऑक्टेन संख्या या दर मान आइसो-ऑक्टेन तथा n-हेप्टेन के मिश्रण में आइसो-ऑक्टेन की वह प्रतिशत मात्रा है जो किसी ईंधन की अपस्फोटक क्षमता से समानता रखती है, अर्थात् किसी ईंधन में उतना ही अपस्फोटन होता है जितना कि 60% आइसो-ऑक्टेन तथा 40%n-हेप्टेन के मिश्रण में होता है, तो इस ईंधन की ऑक्टेन संख्या 60 मानी जायेगी। अच्छी गैसोलीन का ऑक्टेन दर का मान 80 या इससे अधिक होता है। वायुयान में प्रयुक्त की जाने वाली गैसोलीन का ऑक्टेन दर मान 100 होता है। 

कभी-कभी इस ऑक्टेन संख्या को उत्प्रेरक भंजक द्वारा भी बढ़ाया जा सकता है। इस कार्य में प्रयुक्त किये जाने वाले उत्प्रेरक सिलिकॉन तथा ऐलुमिनियम के ऑक्साइड हैं जिनमें अल्प मात्रा में मैग्नीशिया मिला रहता है। इन उत्प्रेरकों की उपस्थिति में 28-30 वायुमण्डलीय दाब पर गैसोलीन को 600°C ताप पर गर्म करने पर उसका ऑक्टेन नम्बर बढ़ जाता है। इसका कारण गैसोलीन में बेन्जीन तथा टॉलुईन की बढ़ी हुई मात्रा है। इस क्रिया को उत्प्रेरक भंजन अथवा रिफार्मिंग (reforming) कहते हैं। गैसोलीन के भंजन में गोंद निर्मित न हो इस कारण कुछ निरोधक (inhibitors) इसमें मिलाये जाते हैं। यह कार्य फिनोल अथवा ऐरोमैटिक ऐमीनों द्वारा किया जाता है।

ऑक्टेन का सूत्र -

C₈H₁₈

Q (1) भारत में पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर क्या है?

Ans - 91 ऑक्टेन 

Q (2) पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर कैसे पता करते हैं?

Ans - किसी ईंधन की ऑक्टेन संख्या को एक परीक्षण इंजन में आइसो-ऑक्टेन और हेप्टेन के मिश्रण के विरुद्ध मापा जाता है। 


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